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मन थामी सुन्नु हजुर लाहुरेको कथा |
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बाध्यताले जानु पर्यो, तिम्लाई छाडेर |
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कुन शहरमा पुग्यौ कुन्नि मेरो गाँउ छोडी |
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अंगाले छौ अरुलाई, रोपी छुरा मेरो मूटुमा |
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मेरो रहर होईन मेरो चाह होईन |
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के भन्नु र अब मैले छोडि जानेलाई |
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अल्झिएर कहि कतै, लड्न पनि सक्छौ |
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गल्ति भयो मेरो हजुर नजाने रै धेरै |
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आकाशको पंछि थियौ, उड्थ्यो वरपर |
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ति पलहरु बितिगए, आउने दिनलाई कल्पि नु छ |
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चन्चले तिम्रो बानी हजुर, मेरो भन्नु केहि छैन |
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नखानु है हरेस कतै सम्झिरहनु जितलाई |
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भुल भयो नजानेर, पराई नभईदेउ |
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सबको मन कहा हुन्छ एकै बराबर |
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तिमि प्यारी फुलको, टेकि डाली माथि |
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हिजो आज जता ततै, चल्छ तिम्रो चर्चा |
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बगेर पानी सरि, तिम्लाई बगाउँ कि? |
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कहाँ बाट आयो हुरी, मनै उडाई लग्यो |
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